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Shyamteach is a collection of educative, informative and inspirational articles, stories, poems, satires etc.
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फागुन के रंग, मस्ती के संग टेसू की डाली लाल हुई, आई प्रकृति में नई उमंग। धरा सजी है बसंती रंग, भ्रमर गुनगुन करते मंडराए…
उस घर करना शादी पापा उस घर करना शादी जहां आपको सम्मान मिले जहाँ सूरत से सीरत से लोगो को पहचाना जाता हो उस घर सबका एकसा …
होली के लाल रंग में, लाल हुआ है मेरा हाल लाल तन हुआ लाल बदन, चारो तरफ रंग गुलाल। होली की हुड़दंग में, लाल हुए है सबके गा…
आज ये कोहरा ऐसा छाया, पास का भी नजर न आया ढक डाली का चादर ऐसी दिखती सबकी धुंधली काया सर्द हुई है सारी धरती सर्द हुआ …
सिहर जाता हूँ देख उन बच्चों को जिसके हाथों से किताब छिन जाती है दोजून खाने के खातिर माँ, दिन भर अपनी जान जलती है। रुधि…
अभी-अभी कमाई है ईज्जत भरी जिंदगी इसके पीछे वर्षों की ईमानदारी लगाई है कड़ी धूप …
नही असंभव काम कोई भी नही गगन है ऊँचा हम से नदी की धारा बहती हरदम रुकना नही उसके वश में सूर्य किरण को रोकना है तुमको बाद…
बस यूँ कहो कि ये पल रुक जाए जैसे थे हम बैसे ही थम जाएं कुछ क्षण ही सही सुकून से एक दूजे के संग कहीं खो जाए। कुछ क्षण के…
दिवाली का रोशन दिया दीपों की लंबी कतार, झिलमिलाता सा रोशन उजाला मिट्टी का नन्हा दिया, पूरे जोश से हरता सतत अंधेरा। टिम…
अच्छाई का तीर चला जब बुराई ने दम तोड़ दिया सच्चाई का नन्हा दीपक ने घोर अँधेरा दिया भगा। टिम-टिम करते तारों ने आसमान को…
बेटी@ जब काम से लौटा घर मैं आहत से पहचान जाती है पापा घर आ गए है नीचे सीढ़ी तक आती है। पता नही क्या दिल का रिश्ता या ज…
तजुर्बा जिन्दगी का तजुर्बा कच्चा की रह गया। जब पक्की उम्र में अपनो को खो गया। सोचता, उम्र के साथ गाढ़ी होगी जिंदगी बढ़ती …
विश्वास इस कदर डोल रहा, खुद पर एक विश्वास बाकी है। अनजान भीड़ में भटकता रहा अकेला अपनों से अनकही तकरार बाकी है। साँसे ल…
आसमां के स्वामी आसमां को देखकर, धरती पुकारती है उठती है आग दिल मे, ठंडक तलाशती है ये आस भारी निगाहें, क्यो नम पड़ी हु…
भोरप्रभा आसमान की ओट लिए, यूँ झाँक रहा है भानू सा मनमौला चमकीला, लाल सुनहरा दमकीला सा। भोर सवेरे खग की चहक, उपवन में च…
उमंग-तरंग मन सतरंग बिखरे है अजीब से रंग इनके सदा खेल निराले सुंदर मन बना चितरंग। सरल तरल गरल खलल मनभोर मनचोर करल भोल…
खामोश बस्तियां मत जोड़ो मुझे, किसी की हस्ती से हमे यूँ ही, मस्त मौला ही रहने दो जिया हूँ, सुकून भरी जिंदगी में यहाँ इन न…
मुझे इंसान ही रहने दो प्रकृति के कण-कण में समाया है उमंग उफनती नदियाँ को उल्लास में बहने दो। आकाश ऊँचाई से निहारे, धरा …
हे कान्हां! तुम्हें फिर से आना होगा हे गिरधारी गोविन्द, तुम्हें धरती पर फिर आना होगा दुशासन से घिरी द्रोपती का, छीर फ…
ज्ञान के भंडार है शिक्षक डगमगाते नन्हे कदमों को, प्यार से तुमने थमा था कोरे मस्तिष्क में तुमने ही, ज्ञान का चित्र उकारा…
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