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Shyamteach is a collection of educative, informative and inspirational articles, stories, poems, satires etc.
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फागुन के रंग, मस्ती के संग टेसू की डाली लाल हुई, आई प्रकृति में नई उमंग। धरा सजी है बसंती रंग, भ्रमर गुनगुन करते मंडराए…
नही असंभव काम कोई भी नही गगन है ऊँचा हम से नदी की धारा बहती हरदम रुकना नही उसके वश में सूर्य किरण को रोकना है तुमको बाद…
बस यूँ कहो कि ये पल रुक जाए जैसे थे हम बैसे ही थम जाएं कुछ क्षण ही सही सुकून से एक दूजे के संग कहीं खो जाए। कुछ क्षण के…
अच्छाई का तीर चला जब बुराई ने दम तोड़ दिया सच्चाई का नन्हा दीपक ने घोर अँधेरा दिया भगा। टिम-टिम करते तारों ने आसमान को…
विश्वास इस कदर डोल रहा, खुद पर एक विश्वास बाकी है। अनजान भीड़ में भटकता रहा अकेला अपनों से अनकही तकरार बाकी है। साँसे ल…
आसमां के स्वामी आसमां को देखकर, धरती पुकारती है उठती है आग दिल मे, ठंडक तलाशती है ये आस भारी निगाहें, क्यो नम पड़ी हु…
क्यों ठिठुर रहे है बढ़ते पग क्यो कांप रहे उड़ जाने को तूफान उठाके सीने में बढ़ जाओ आसमानों में पंख है मजबूत तुम्हारे यकीन…
भोरप्रभा आसमान की ओट लिए, यूँ झाँक रहा है भानू सा मनमौला चमकीला, लाल सुनहरा दमकीला सा। भोर सवेरे खग की चहक, उपवन में च…
उमंग-तरंग मन सतरंग बिखरे है अजीब से रंग इनके सदा खेल निराले सुंदर मन बना चितरंग। सरल तरल गरल खलल मनभोर मनचोर करल भोल…
ज्ञान के भंडार है शिक्षक डगमगाते नन्हे कदमों को, प्यार से तुमने थमा था कोरे मस्तिष्क में तुमने ही, ज्ञान का चित्र उकारा…
भारत माता के चरणों में हम, शत-शत शीश झुकायेंगे देश की शान मेरा है तिरंगा, शान से हम फहराएंगे । सोहंदी खुशबू देश माटी, …
सख्शियत हमारी ऊँची हैं इसलिए लोग हमें तजब्बू देते है वरना लोग तो ऊँचे आसमान में भी कमियाँ खोज लेते है। जिंदगी की राहे…
सफर-ए-जिन्दगी चला जा रहा हूँ अनजान राहों में पता नहीं मंजिल कितनी दूर है थकना मना है बीच राहों में यहाँ …
अरे आज क्या हुआ, सब तरफ सन्नाटा क्यों है? जब आज दुकान खुली ही नही, तो घाटा क्यों है? आज कदम क्यो रुक गए…
"न मैं गलत, न तुम!" कभी तुम्हे समझने की, कोशिश करता हूँ , कभी अपने आपको, न तुम गलत हो, न मैं गलत हूँ। फिर य…
कविता- अवसर ये सजा नही है साथी, ये अवसर है अपने को तरासने का, सफर है। यहाँ सीख बट रही है, राहो में ये मौका , बटोरने का …
गुजर रहा है वक्त अभी, फिसल रहा है तिनका हर शख्स बूढ़ा हो रहा , क्यों भ्रम पाले है मनका। नही जवानी साथ किसी के, अंत तक …
क्या अक्सर खुद को , हवाओं से उलझते देखा है धरती की उमस से डरकर, तरुवर को भागते देखा है। अक्सर करते थे नादानी, बचपन में…
साथ तुम्हे देना होगा समाज की धुरी हमारी, समाज की ये नीव कहलाये हरपल हर घड़ी हर समय,ये हमे सही राह दिखलाये। गिरते का हाथ …
घर आँगन की किलकारी, पेड़ की नन्ही डाली मुख मुस्कान ऐसी है मानो, सजे चेहरे पर बाली। नन्हे-नन्हे कदम है इसके , नन्ही सी मु…
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