टिम-टिम करते तारों ने
आसमान को चमकाए
एक-एक फूल की खुशबू से
सारी बगियाँ को महकाये।
सत्य हमेशा बडा असत्य से
सच्चाई से मान बढ़ा
दयालुता और सेवा भाव से
सबमे सच्चा सम्मान बढ़ा।
पर्व दशहरा कहता सबको
अपनी बुराईयों को पहचानो
अपने अंदर के रावण को
अपने हाथों जला डालो।
छल-कपट अभिमान दंभ ने
हम सब को है घेर लिया
मन मे बैठा अज्ञात रावण
स्वच्छ मन कुंठित किया।
नही मारने इस रावण को
राम कलियुग में आएगा
अपने कर्मों से खुद की मानव
खुद से मर जायेगा।
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रचनाकार
®श्याम कुमार कोलारे
छिन्दवाड़ा, मध्यप्रदेश (मध्यप्रदेश)
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