नही गगन है ऊँचा हम से
नदी की धारा बहती हरदम
रुकना नही उसके वश में
सूर्य किरण को रोकना है
तुमको बादल बनना होगा
तपिस मिटाने दुनिया की तो
बारिश बन गिरना होगा ।
आँधी से टकराओगे जब
शक्ति हो सीने में
सब के दिल मे राज करोगे
तब असली मजा है जीने में
सीख सीखने जा चींटी से
मेहनत का तू सीख ले पाठ
जीवन ने गर जीत सको तो
जीत तो अपना सम्मान।
माटी से तुम कभी न हटना
धरती में रखना तुम पाँव
गगन को छूना सीख गर लें
जीत खुशी से हरदम पास
श्याम देख मन मंदिर में
ईश बसे है सबके साथ
सब मे रहिये सबमे बसिये
बात फते की रखियो माथ।
श्याम कुमार कोलारे, छिंदवाड़ा म.प्र.
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