होली के लाल रंग में, लाल हुआ है मेरा हाल
लाल तन हुआ लाल बदन, चारो तरफ रंग गुलाल।
होली की हुड़दंग में, लाल हुए है सबके गाल
होली का रंग बरसा ऐसा, बूझ ना पाया मेरा हाल ।
घुंगराले से बाल रंगे है, लचकी हुई थी उसकी चाल
स्वेत वस्त्र अब चितरंगे हो गये, हुआ हाल बेहाल।
पिचकारी भरी प्रेम रंग में, हाथों में स्नेह गुलाल
सम्मान तिलक पीले गुलाल का, प्यार का है लाल।
नीला पीला लाल गुलाबी, और केशरिया कितने रंग
होली खेलन रंगों की निकले, लाल हुआ जब सखा संग।
मन मेहर हिचकोले मारे, चले जब रंगों की पिचकारी
रंगों की इस होली में रंगी है, जैसे रंगीन दुनियाँ सारी।
//श्याम कुमार कोलारे//
