सिहर जाता हूँ देख उन बच्चों को जिसके हाथों से किताब छिन जाती है दोजून खाने के खातिर माँ, दिन भर अपनी जान जलती है। रुधि…
अभी-अभी कमाई है ईज्जत भरी जिंदगी इसके पीछे वर्षों की ईमानदारी लगाई है कड़ी धूप …
स्वेटर पाकर गदगद हुए शासकीय प्राथमिक शाला शंकर कॉलोनी कुसमैली के बच्चे दिसम्बर माह क शरू होते ही ठंड ने दवे पाँव अपनी द…
नही असंभव काम कोई भी नही गगन है ऊँचा हम से नदी की धारा बहती हरदम रुकना नही उसके वश में सूर्य किरण को रोकना है तुमको बाद…
बस यूँ कहो कि ये पल रुक जाए जैसे थे हम बैसे ही थम जाएं कुछ क्षण ही सही सुकून से एक दूजे के संग कहीं खो जाए। कुछ क्षण के…
छिन्दवाड़ा(सारना) - शासकीय प्राथमिक शाला लहगडुआ शिक्षक गीता भलावी ने अपने सेवानिवृत्ति के अवसर पर संकुल प्राचार्य आरएस ब…
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