@@एक तस्वीर बनाते है@@
चलो मन में एक छबि बनाते है
सच्चाई के रंग से उसको सजाते है
जिसमे न हो कोई झूठ की स्याही
ऐसी एक हम कलम उठाते है
चलो आज एक तस्वीर बनाते है।
जो न चले कुरीति पर कभी
ऐसा हम सजे पैर बनाते है
न हो जिसमे घूसखोरी,भ्रष्टाचारी
ऐसे हम उसके हाथ बनाते है
चलो आज एक तस्वीर बनाते है।
जिसके कमर न हो दोमुही तलवार
सेवाभाव के जसवा रखने वाला
आज हम सीना बनाते है
जिसके दिल सत्य का बासा
ऐसा भाव डलवाते है
चलो आज एक तस्वीर बनाते है।
जिसका मन हो सदा शांत
कर उठता हो मदद में हर वार
असत्य में न झुके किसी के सामने
ऐसा परहित का एक सिर लगाते है
चलो आज एक तस्वीर बनाते है।
सोच-सोच कर बुद्धि हुई आधी
ऐसा रंग मिलना हुआ बड़ा भारी
सत्य धर्म की एक कलम न पाई
उसकी एक मन मे छबि बनाते है
चलो आज एक तस्वीर बनाते है।
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श्याम कुमार कोलारे
छिन्दवाड़ा, मध्यप्रदेश
