🐋 *मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता* _ख्वाहिश नहीं मुझे_ _मशहूर होने की, _आप मुझे पहचानते हो_ …
पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात! सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!! *धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!* दुख…
*नई नवेली दुल्हन जब* *ससुराल में आई* तो उसकी *सास बोली* : बींदणी कल माता के मन्दिर में चलना है। *बहू ने पूछा*: सा…
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