माँ की महिमा

 माँ की महिमा


​माँ केवल इक शब्द नहीं, पावन एक अहसास।

जीवन का आधार है, ईश्वर का विश्वास।।

​माँ के शब्द शक्ति अनुपम। भक्ति भाव ईश्वर से उत्तम।।

माँ जननी जगदम्बा रूपा। ममता स्तंभ सुदृढ़ अनूपा।।

प्रेम नदी ममता की सागर। स्नेह भरी करुणामय गागर।।

तुझसे शुरू प्राण की साँसें। पूरी हुई हृदय की आसें।।

​लहू तुम्हारा रग-रग बहता। मेरा जो सब तेरा रहता।।

बिन तेरे नहिं जीवन मेरा। तू ही साझ और तू सवेरा।।

अगणित माँ उपकार तुम्हारे। मेटे संकट कष्ट हमारे।।

मांस पिंड मैं निर्बल आया। फूँक प्राण तूने हर्षाया।।

​कंठ स्वरूपा वाणी तेरी। पग में शक्ति समाणी तेरी।।

बुद्धि ज्ञान सब तेरी माया। तूने सकल विश्व लुटाया।।

​ऋणी रहूँ हर जन्म में, बस यह आरज़ू मोय।

हाथ रहे सिर पर सदा, और न कुछ भी होय।।


श्याम



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