जीवन में संघर्ष भी बहुत कुछ,सिखा जाता है
कभी-कभी श्राप भी, वरदान बन जाता है
वादाम खाने से नहीं बढता दिमाग जितना
कठिन परिस्थितिओं से जूझकर बढ जाता है l
जब कठिनाइयाँ घेर ले हमें चारो तरफ से
संभालने का न दे मौका,अपने दूर हो जाए
मत टूटना अपने से, खुद पर रखना विश्वास
पता नहीं इस दौर में, तीसरी आँख खुल जाए l
खुद के भरोसे से, दुनिया सारी नाप लो
अपने बाजु की शक्ति से वो रुख मोड़ लो
उन हवाओं का मंजर रोक लो दम पर अपने
जो तूफान छप्पर उड़ने का, इरादा रखती हो l
जिस दिन सुबह हो, इरादों को जीतने की
भरोसा हो अपने पर, जूनून हो कर गुजरने का
वो दिन दूर नहीं खुद पर विश्वास करो
शाम तक सफलता डेहरी पर पड़ी होगी l
जीतना हर बार जरुरी नहीं दूसरो से
हारकर भी जीतते है लोग अक्सर l
*लेखक/कवि*
श्याम कुमार कोलारे

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